सामंजस्य संसार के मानचित्र पर, जीवन के चलचित्र पर खुशियों और दुखों के भंवर में फंसा इंसान; भागता चला जाता है आपनी धुन में और नहीं देख पता है उनको, जिनके चेहरे पर सदा एक सौम्य है विद्यमान|| मृगत्रिष्णा में भटकता इंसान नहीं महसूस कर पता है उन चेहरों की तृप्ति को जिनके पास अब कुछ खोने को नहीं है शेष | अपनी ही धुन में वह जीते हैं ज़िन्दगी को क्योंकि ज़िन्दगी ने कुछ भी छोडे नहीं है उनके अवशेष || नहीं डर है उन्हें कुछ चले जाने का और कुछ पाने पर उसका स्वागत करेंगे वह विशेष | संसार का सामंजस्य बैठाएं हैं यही लोग वरना कब तक रसातल में पहुँच गया होता यह मानव लोक ||
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Showing posts from March, 2009
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बिटिया की शादी बचपन में नानी सुनाती थी एक कहानी दूर जंगल में रहती थी एक गुडिया सयानी | रहता था वहीँ एक खौफनाक भेडिया कहता था चुरा लेगा गुडिया की बिटिया || चिंतित हो गुडिया ढूँढने लगी एक राजकुमार जो करे न्यौछावर उसकी बिटिया पर बेशुमार प्यार | लगाने लगा भेडिया घर के रोज चक्कर रहने लगीं जिससे दोनों डर-डरकर || बहुत ढूँढने पर गुडिया को मिला एक राजा जो उम्र में बिटिया से था बस दो-तीन गुना ही ज्यादा | और आनन् फानन में बज गया शादी वाला बंद बाजा सोचकर की मुक्त हो गयी भेडिये की दहशत से बिटिया || गुडिया ख़ुशी से सो सकी रात भर चैन की निंदिया ; ना समझ सकी नादान की दुनिया तो है और भी जालिम कैसे सब सह सकेगी उसकी फूल सी बिटिया || नानी की कहानी तो हो गयी पुरानी पर हकीकत में आज भी सड़कों और झोपड्पातीं में रहती हैं ऐसी सयानी माँ | जो कम उम्र में ब्याह देतीं हैं अपनी बिटिया ताकि छू ना सके उन्हें मंडराते हुए इंसानी भेडिये || जानकर भी अनजान बना दी जाती हैं बेटियाँ दुनियाँ की रस्मों से, झूलों से, गुड्डों से, गुडियों से और पालनों से | बचपन में, बचपन से पहले ही बन जाती हैं उम्र से भी ज्यादा सयानी यह गुडि...