बिटिया की शादी
बचपन में नानी सुनाती थी एक कहानी
दूर जंगल में रहती थी एक गुडिया सयानी |
रहता था वहीँ एक खौफनाक भेडिया
कहता था चुरा लेगा गुडिया की बिटिया ||
चिंतित हो गुडिया ढूँढने लगी एक राजकुमार
जो करे न्यौछावर उसकी बिटिया पर बेशुमार प्यार |
लगाने लगा भेडिया घर के रोज चक्कर
रहने लगीं जिससे दोनों डर-डरकर ||
बहुत ढूँढने पर गुडिया को मिला एक राजा
जो उम्र में बिटिया से था बस दो-तीन गुना ही ज्यादा |
और आनन् फानन में बज गया शादी वाला बंद बाजा
सोचकर की मुक्त हो गयी भेडिये की दहशत से बिटिया ||
गुडिया ख़ुशी से सो सकी रात भर चैन की निंदिया ;
ना समझ सकी नादान की दुनिया तो है और भी जालिम
कैसे सब सह सकेगी उसकी फूल सी बिटिया ||
नानी की कहानी तो हो गयी पुरानी पर हकीकत में
आज भी सड़कों और झोपड्पातीं में रहती हैं ऐसी सयानी माँ |
जो कम उम्र में ब्याह देतीं हैं अपनी बिटिया
ताकि छू ना सके उन्हें मंडराते हुए इंसानी भेडिये ||
जानकर भी अनजान बना दी जाती हैं
बेटियाँ दुनियाँ की रस्मों से,
झूलों से, गुड्डों से, गुडियों से और पालनों से |
बचपन में, बचपन से पहले ही बन जाती हैं
उम्र से भी ज्यादा सयानी यह गुडियाँ ||
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