खोज

आओ चलो खोजें आज खुद को
खो गई है रोशनी जो जीवन की चकाचौंध में|

आए थे हम इस दुनिया में एक नई पहचान बनाने
जान ना सके कब कैद हो गए अदृश्य दायरों में|

खुली तो थी आंखें और सजते भी थे कई सपने
आज जाना की बंद आंखों पर चढ़े थे कई रंगीन चश्मे|

आज जब टूटा है छन्न से झूठों का आईना
तो सन्नाटे में गूंज रही है बस यही आवाज़

आज अगर कर लिया है खुद से सामना
तो फिर से इसे सुनहरे पर्दों से मत ढ़पना|

मिला लो हाथ उस ज़िंदगी से जो रख सके तुम्हें ज़िंदा
कर जाओ फिर कुछ ऐसा कि याद रखे दुनिया हमेशा|

आओ चलो आज एक नई पहचान कर लो खुद से
संवारेंगे आने वाले कल आज यह वादा कर लो खुद से||

रुपाली

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