Posts

हां ! मैं एक नारी हूं

 कोरे कागज पर कुछ शब्द उकेरना चाहती हूं। अपने जज्बातों को स्याही के सभी रंग देना चाहती हूं। जीवन के हर मोड़ को एक नया आयाम देना चाहती हूं। हां! मैं एक नारी हूं और अपनी कहानी सबको बताना चाहती हूं। एक नवजात शिशु की तरह खुलकर हंसना चाहती हूं। कुछ अच्छा ना लगे तो दिल खोलकर रोना चाहती हूं। गीली मिट्टी से बार बार लहरों के पास घर बनाना चाहती हूं। हां! मैं एक नारी हूं और फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं। इंद्रधनुष के सातों रंगों को खुद में समेटना चाहती हूं। सूरज की थोड़ी लालिमा माथे पर सजा लेना चाहती हूं। चंद्रमा की थोड़ी शीतलता दिल में बसा लेना चाहती हूं। हां ! मैं एक नारी हूं और सारी सृष्टि को खुद में समा लेना चाहती हूं। रुपाली वर्मा माहेश्वरी बिना पंखों के भी आकाश में उड़ना चाहती हूं। खल खल बहती नदी सी बस आगे बढ़ना चाहती हूं। बेमतलब की जंजीरों से खुद को आजाद करना चाहती हूं। हां ! मैं एक नारी हूं और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना चाहती हूं।

झूठ

झूठ बोलने की कहानी तो है सदियों पुरानी इंसान के अहम से बांधी है इसकी गठजोड़ की रवानी। यह है ऐसी काली छाया कोई नहीं इससे बच पाया खुद को सही साबित करने के लिए सबने इसे अपनाया। हमने बोला तो ठीक मगर दूसरे का कांटा बन दिल में चुभा सा पाया बच्चों ने बोला तो दिल को लुभाया और बचपना समझ कर इसे हंसी में भुलाया। बीज शायद वहीं हमारे मन में पनप गया कि हमारे बोले झूठ में नहीं है कोई बुराई अगर पता ना चले तो बन जाएगी यही सच्चाई। नहीं जान पाए कि कब झूठ की इस हम दीमक ने हमें अंदर  से कर दिया खोखला दूसरों के झूठ का सच तो दिखा मगर अपना आइना हमेशा रहा धुंधला। दूसरों को गलत साबित करने में ही जीवन बीत जाता है और खुद का राक्षस दमन करने का ख्याल ही नहीं आता है। आज ही है वक़्त सुनने के लिए अन्तर्मन की आवाज़ जो कर सकेगी एक स्वार्थहीन जीवन का आगाज़। होगी तो कठिनाइयों भरी यह दिशा पर यही  मिटाएगी जीवन की हर निशा। पर यही  मिटाएगी जीवन की हर निशा।।

A True Friend

Everyday through Day and Night Something has always been at my side. Through thick and thin, Through fame and shame It has but remained the same. It had been with me since birth And promised to stay till my death. A promise so difficult to get in today's world Some may wonder who can be that coveted one. So, my friends let me tell you hither Wherever we may sway and wander Our shadow will always be there beside us. To enlighten our path through the journey of life. A True Friend which even death can't separate.

खोज

आओ चलो खोजें आज खुद को खो गई है रोशनी जो जीवन की चकाचौंध में | आए थे हम इस दुनिया में एक नई पहचान बनाने जान ना सके कब कैद हो गए अदृश्य दायरों में | खुली तो थी आंखें और सजते भी थे कई सपने आज जाना की बंद आंखों पर चढ़े थे कई रंगीन चश्मे | आज जब टूटा है छन्न से झूठों का आईना तो सन्नाटे में गूंज रही है बस यही आवाज़ आज अगर कर लिया है खुद से सामना तो फिर से इसे सुनहरे पर्दों से मत ढ़पना | मिला लो हाथ उस ज़िंदगी से जो रख सके तुम्हें ज़िंदा कर जाओ फिर कुछ ऐसा कि याद रखे दुनिया हमेशा | आओ चलो आज एक नई पहचान कर लो खुद से संवारेंगे आने वाले कल आज यह वादा कर लो खुद से || रुपाली
सामंजस्य संसार के मानचित्र पर, जीवन के चलचित्र पर खुशियों और दुखों के भंवर में फंसा इंसान; भागता चला जाता है आपनी धुन में और नहीं देख पता है उनको, जिनके चेहरे पर सदा एक सौम्य है विद्यमान|| मृगत्रिष्णा में भटकता इंसान नहीं महसूस कर पता है उन चेहरों की तृप्ति को जिनके पास अब कुछ खोने को नहीं है शेष | अपनी ही धुन में वह जीते हैं ज़िन्दगी को क्योंकि ज़िन्दगी ने कुछ भी छोडे नहीं है उनके अवशेष || नहीं डर है उन्हें कुछ चले जाने का और कुछ पाने पर उसका स्वागत करेंगे वह विशेष | संसार का सामंजस्य बैठाएं हैं यही लोग वरना कब तक रसातल में पहुँच गया होता यह मानव लोक ||
Image
बिटिया की शादी बचपन में नानी सुनाती थी एक कहानी दूर जंगल में रहती थी एक गुडिया सयानी | रहता था वहीँ एक खौफनाक भेडिया कहता था चुरा लेगा गुडिया की बिटिया || चिंतित हो गुडिया ढूँढने लगी एक राजकुमार जो करे न्यौछावर उसकी बिटिया पर बेशुमार प्यार | लगाने लगा भेडिया घर के रोज चक्कर रहने लगीं जिससे दोनों डर-डरकर || बहुत ढूँढने पर गुडिया को मिला एक राजा जो उम्र में बिटिया से था बस दो-तीन गुना ही ज्यादा | और आनन् फानन में बज गया शादी वाला बंद बाजा सोचकर की मुक्त हो गयी भेडिये की दहशत से बिटिया || गुडिया ख़ुशी से सो सकी रात भर चैन की निंदिया ; ना समझ सकी नादान की दुनिया तो है और भी जालिम कैसे सब सह सकेगी उसकी फूल सी बिटिया || नानी की कहानी तो हो गयी पुरानी पर हकीकत में आज भी सड़कों और झोपड्पातीं में रहती हैं ऐसी सयानी माँ | जो कम उम्र में ब्याह देतीं हैं अपनी बिटिया ताकि छू ना सके उन्हें मंडराते हुए इंसानी भेडिये || जानकर भी अनजान बना दी जाती हैं बेटियाँ दुनियाँ की रस्मों से, झूलों से, गुड्डों से, गुडियों से और पालनों से | बचपन में, बचपन से पहले ही बन जाती हैं उम्र से भी ज्यादा सयानी यह गुडि...